राजस्थान में सत्ताधारी बीजेपी की शर्मनाक हार,: पार्षद जीते 10, चेयरमैन पद पर वोट मिले जीरो… राजस्थान की एक नगरपालिका में BJP की अजीब हार
सदावत इससे पहले भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं. इसके अलावा राजस्थान भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा के पर्सनल एडवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे. भाजपा ने चेयरपर्सन पद के लिए गीता देवी को उम्मीदवार बना दिया. इसके बाद सदावत निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतर गए.
पार्षद जीते 10, चेयरमैन पद पर वोट मिले जीरो… राजस्थान की एक नगरपालिका में BJP की अजीब हारसबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी भाजपा को नगरपालिका चेयरमैन का पद नहीं मिल पाया. इतना ही नहीं, हैरान करने वाली बात तो यह है कि चेयरमैन पद के लिए भाजपा उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला.
VISHNU AGRAWAL/DAILY INDIATIMES

राजस्थान में नगर निकाय के चुनाव हाल ही हुए हैं. इस बीच नागौर जिले में हुए नगरपालिका चुनाव में भाजपा को एक अजीब हार का सामना करना पड़ा. नागौर की मुंडवा नगरपालिका में भाजपा ने पार्षदों की 25 में से 10 सीटें जीती थी और सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी भाजपा को नगरपालिका चेयरमैन का पद नहीं मिल पाया. इतना ही नहीं, हैरान करने वाली बात तो यह है कि चेयरमैन पद के लिए भाजपा उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला.
किसे मिले कितने वोट?
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की उम्मीदवार अलका देवी कंडोई को 13 वोटों के साथ जीत मिली है. अलका देवी को कांग्रेस का समर्थन था. उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत को सिर्फ एक वोट से हराया. सदावत ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था क्योंकि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था. वहीं, भाजपा की उम्मीदवार गीता देवी को शून्य वोट मिले.
हैरान करने वाली बात यह है कि 25 सदस्यों वाली मुंडवा नगरपालिका के चुनाव में भाजपा ने 10 वार्ड, RLP ने सात, कांग्रेस ने तीन और निर्दलीय उम्मीदवारों ने पांच वार्ड जीते थे, लेकिन फिर भी भाजपा उम्मीदवार को एक भी वोट कैसे नहीं मिला.चेयरमैन पद के चुनाव के लिए कांग्रेस ने आरएलपी से हाथ मिला लिया था और अलका देवी कंडोई को अपना समर्थन दे दिया. कांग्रेस के तीन पार्षद थे और आरएलपी के सात. ऐसे में दोनों पार्टियों के कुल पार्षदों की संख्या 10 हो गई. हालांकि, कंडोई को कांग्रेस और आरएलपी पार्षदों की संख्या से से तीन ज्यादा 13 वोट मिले. वहीं, उनके सामने खड़े निर्दलीय उम्मीदवार घनश्याम सदावत को 13 वोट मिले. इस तरह आरएलपी उम्मीदवार सिर्फ एक वोट से चेयरपर्सन का चुनाव जीतने में कामयाब रहा.
निर्दलीय ने किया खेला?
सदावत इससे पहले भाजपा के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीत चुके हैं. इसके अलावा राजस्थान भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ज्योति मिर्धा के पर्सनल एडवाइजर के तौर पर काम कर रहे थे. भाजपा ने चेयरपर्सन पद के लिए गीता देवी को उम्मीदवार बना दिया. इसके बाद सदावत निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव में उतर गए.