EXCLUSIVE PODCAST: आज के युवा गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं को अपनाएं और SOCIAL MEDIA और नशे की लत त्यागे, SATNAM SINGH, कथा वाचक, PANJAB
JOURNALIST VISHNU AGARWAL के साथ एक Exclusive Podcast मे गुरु ग्रंथ साहिब कथा वाचन SATNAM SINGH ने गुरु वाणी की सुन्दर शब्दों में व्याख्या करते हुए कहा कि "" सत्य , सेवा और कर्म "" गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं में प्रमुख हैं.. उन्होंने कहा कि युवाओं को गुरु वाणी से मार्गदर्शन लेना चाहिए और गुमराह होने से बचना चाहिए


EXCLUSIVE PODCAST: आज के युवा "गुरु ग्रंथ साहिब" की शिक्षाओं को अपनाएं और SOCIAL MEDIA और नशे की लत त्यागे, SATNAM SINGH, कथा वाचक, PANJAB
EXCLUSIVE PODCAST WITH SATNAM SINGH (कथा वाचक) गुरु ग्रंथ साहिब, पंजाब
VISHNU AGRAWAL/NEWS EDITOR/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM


JOURNALIST VISHNU AGARWAL के साथ एक Exclusive Podcast मे गुरु ग्रंथ साहिब कथा वाचन SATNAM SINGH ने गुरु वाणी की सुन्दर शब्दों में व्याख्या करते हुए कहा कि "" सत्य , सेवा और कर्म "" गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं में प्रमुख हैं.. उन्होंने कहा कि युवाओं को गुरु वाणी से मार्गदर्शन लेना चाहिए और गुमराह होने से बचना चाहिए
धर्म के नाम पर विवाद के सवाल पर SATNAM SINGH ने कहा कि कुछ एजेंसियां विवाद का काम कर रही हैं जो हमें एक नहीं होने देतीं। आज अगर सारी संप्रदाय एक ही हो जाएं - हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई - हम आपस में भाई-भाई हैं। अगर हम भाई बनकर चलें तो दुनिया में कोई भी विवाद नहीं रहेगा।"


गुरु की वाणी में लिखा गया है। गुरु साहब
वाणी में कहते हैं जीत पीते मत उतरे कि
ऐसा नशा ना करो जिसके पीने से हमारी जो मत
पर पर्दा पड़ जाए। भाव कि हमको ये भी ना
पता चले कि हमारा घर वाला कौन है और बाहर
वाले कौन है। ऐसा नशा क्या करना? ये नशा
करना है तो केवल एक प्रेम का नशा करो।
वाणी का नशा करो कि जीत
बीते मत उतरे। भाव कि नशा कौन सा करना है
केवल प्रेम का। जब वाणी अंदर जाएगी तो
हमारे अंदर यह भावना उठनी चाहिए, चलनी
चाहिए कि हम सब एक भाई हैं। कोई धर्म अलग
नहीं है। क्योंकि हम सब में अगर एक रंग का
खून चल रहा है तो हम बिन भाव क्यों करते
हैं? किसी से ऊंच-नीच क्यों करते हैं?
क्योंकि परमात्मा एक जगह बैठा है और आने
वाले जगह जगह से आते हैं। जैसे हरमंदर
साहब के चार दरवाजे हैं कि उसका एक अर्थ
है क्या अर्थ है? कोई हिंदू आए, मुसलमान
आए, सिख आए, ईसाई आए। सबको एक ही उपदेश
है। सतगुरु महाराज वाणी में बोलते हैं
गुरु ग्रंथ साहब की वाणी में अवल नूर पाया
कुदरत के सब बंदे एक नूर ते सब उपजाया कौन
बड़े को बंदे कि कोई भी मारा नहीं है।
सतगुरु कहना कहते हैं कोई मारा नहीं। हम
सब एक हैं। ये भावना कब आएगी? जेकर गुरु
को हम मानेंगे। जेकर गुरु को माने नहीं
मानेंगे नहीं तो नशा भी करेंगे। हमारे
कर्म भी करेंगे उल्टी दिशा में भी चलेंगे।
इसका क्या कारण है? हमारे कर्म है जो हम
अच्छे नहीं करते हैं वो हमारे कर्म ही
हमको दूसरी तरफ ले जाते
1.मेरे जीवन संघर्ष
2.हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई... भाई
3.गुरु वाणी की शिक्षा
