भारत में राजनीतिक हाहाकार: चुनाव आयोग में असहमति : ममता बनर्जी ने की ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग, वोट चोरी पर कटघरे में EC प्रमुख ज्ञानेश
आम लोगों का वोट काट रहे हैं सीईसी- केसी वेणुगोपाल कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल की ने कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री और बीजेपी के एजेंट के तौरआ पर काम कर रहे हैं. वह देश के आम लोगों के वोट कटवाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. यह बिल्कुल साफ है कि वह देश में लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं. उन्हें हटाया जाना चाहिए या उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए."
चुनाव आयोग में असहमति : ममता बनर्जी ने की ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग
VISHNU AGRAWAL EDITOR DAILY INDIATIMES

चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों के बीच राजनीतिक तूफान मच गया है. विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगा है. दरअसल, एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के दो निर्वाचन आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने से लेकर फॉर्म-6 में बदलाव तथा मतदाता सूची के डेटाबेस पर नियंत्रण को केंद्रीकृत करने जैसे मुद्दों पर आपत्ति दर्ज की थी. उनकी आपत्ति के बाद क्या हुआ, इसको लेकर कोई भी जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से एक सफाई जरूर आई है. आयोग का कहना है कि सभी निर्णय बहुमत से लिए गए हैं.

मुख्य चुनाव आयुक्त को गिरफ्तार किया जाए: ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की मांग करने के बजाय उन्हें सीधे अरेस्ट करने की मांग की है. इलेक्शन कमीशन के अंदर की कलह को लेकर विपक्ष मुखर हो गया है, और ममता ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर जमकर निशाना साधा, उन्हें साफ तौर पर बीजेपी की 'B-टीम' बताया. उन्होंने ज्ञानेश कुमार और बीजेपी दोनों की आलोचना की. उन्होंने उन राज्यों में नए चुनाव कराने की भी मांग की, जहां ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव हुए थे. ममता ने कहा कि जिन राज्यों में ज्ञानेश कुमार ने EVM हाईजैकिंग, वोटर लिस्ट में हेरफेर और एडमिनिस्ट्रेशन के गलत इस्तेमाल से BJP को जिताने में मदद की, वहां पुरानी वोटर लिस्ट का इस्तेमाल करके फिर से चुनाव होने चाहिए. ज्ञानेश कुमार एक्सपोज हो गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी 2024 में आपकी (ज्ञानेश कुमार) वजह से जीती. इसके बाद के चुनाव भी आपकी वजह से जीते. BJP को वापस सत्ता में लाने के लिए आप ही पूरी तरह जिम्मेदार हैं. यह कुर्सी आपके लिए नहीं है. BJP जो बहुत ज्यादा तानाशाही कर रही है, उसके लिए भी आप ही जिम्मेदार हैं. ज्ञानेश कुमार ने चुनाव के दौरान पुलिस और सेंट्रल फोर्स का गलत इस्तेमाल किया. जब तक आप उस कुर्सी पर रहेंगे, आपके खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे. यहां तक कि जब आपके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, तब भी स्पीकर ने उसे लोकसभा में पेश नहीं होने दिया था. आप पर इंपीचमेंट नहीं होना चाहिए; आपको अरेस्ट किया जाना चाहिए.
तीनों चुनाव आयुक्त मिलकर ले रहे फैसले- संबित पात्रा
भाजपा ने कांग्रेस शासन काल में चुनाव आयुक्तों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए. पार्टी ने कहा कि जिस मतभेद की खबरें आ रही हैं, वह प्रक्रियात्मक हैं. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "अगर तीनों चुनाव आयुक्त आपस में बातचीत नहीं करते, अगर विचारों का आदान-प्रदान या सलाह-मशविरा नहीं होता और वे बस हर बात पर सहमत हो जाते हैं, तो विपक्षी पार्टियां इसे तानाशाही कहती हैं. उनका कहना है कि इस सरकार ने इन तीनों आयुक्तों को नियुक्त किया है. वे बस 'हां' में 'हां' मिलाते हैं. अब, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इन तीनों के बीच 14 बार पत्र-व्यवहार और आधिकारिक बातचीत हुई है. ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी जाकर ये पत्र पढ़ती है, बल्कि मीडिया की रिपोर्ट बताती है कि तीनों के बीच आधिकारिक बातचीत हुई, जो एक स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है... मैं कहूंगा कि आज सभी विपक्षी पार्टियां एक जाल में फंस गई हैं—यह दावा करने का जाल कि चुनाव आयोग और सरकार तानाशाही तरीके से काम कर रहे थे. इसके उलट, मैं कहूंगा कि यह पूरी तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया है. बातचीत हो रही है, और चुनाव आयोग ने अपने दस्तावेज के पहले ही पैराग्राफ में बहुत साफ तौर पर कहा है कि सभी आधिकारिक लोकतांत्रिक विचार-विमर्श के बाद, अंतिम नतीजा—यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' सर्वसम्मति से हासिल किया गया. दूसरे शब्दों में, तीनों आयुक्त एकमत थे. उनके बीच विचारों का कोई मतभेद या असहमति नहीं थी. वे सभी एक ही राय रखते थे. संक्षेप में, आज स्थिति यह है कि न तो भारत का चुनाव आयोग और न ही भारत की कोई संवैधानिक संस्था तानाशाही शासन के अधीन है. वे लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे हैं और वास्तव में देश के लोकतंत्र को बनाए हुए हैं. लोकतांत्रिक ढंग से काम करके, ये संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र की रक्षा कर रही हैं."
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा, 'सीईसी कुमार जेल जाएंगे'
शिवसेना (यूबीटी) ने संजय राउत ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में लोकतंत्र को बचाने की एक प्रतिशत भी इच्छा है, तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटा दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘ज्ञानेश कुमार को भी बर्खास्त किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. अगर मोदी जी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, तो मैं राष्ट्रपति से अपील करता हूं कि वे सीईसी को बर्खास्त करें.’’ उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति कुछ नहीं करती हैं, तो लोकतंत्र और देश को बचाने के लिए सेना प्रमुख को आगे आना चाहिए. राज्यसभा सदस्य ने यह भी मांग की कि न्यायपालिका को मीडिया में आई खबर का संज्ञान लेना चाहिए.राउत ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) में तीन आयुक्त होते हैं. सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने शिकायत की कि उन्होंने 10 महीनों में 14 आपत्तियां उठाईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया, खासकर एसआईआर के फॉर्म 6 और दूसरे मुद्दों के मामले में. राउत ने कहा, “फिर भी ज्ञानेश कुमार ने इसे आगे बढ़ाया. कैबिनेट सचिव से शिकायत की गई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.”
उन्होंने आरोप लगाया कि कुमार ने “अमित शाह के कहने पर यह देशद्रोह” किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक साजिश की वजह से भाजपा ने पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनाव जीते. महाराष्ट्र में भी भाजपा ने कुमार की वजह से ही विधानसभा चुनाव जीता. गौर करने वाली बात है कि जब नवंबर 2024 में महाराष्ट्र में चुनाव हुए थे, तब कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त नहीं थे. राउत ने दावा किया कि संधू और जोशी ने कुमार के खिलाफ “बगावत” कर दी है. उन्होंने कहा, “देश सुखबीर संधू और विवेक जोशी का आभारी है. उन्होंने देश के सामने ज्ञानेश कुमार का मुखौटा उतार दिया है. उन्होंने गृह मंत्रालय का भी मुखौटा उतार दिया है. जिस तरह से लोग चुनाव जीतते आ रहे हैं और बेईमानी से काम कर रहे हैं.” राउत ने आरोप लगाया, “दस महीनों में इन दो चुनाव आयुक्तों ने 14 आपत्तियां जताई हैं. यह मामला कैबिनेट सचिव और अमित शाह तक पहुंचा था. अमित शाह ने इसे दबा दिया.”
ज्ञानेश कुमार को जेल भेजें, महाराष्ट्र, प.बंगाल, तमिलनाडु में मतपत्रों से दोबारा चुनाव हों : उद्धव
शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेद सामने आने की खबरों का हवाला देते हुए बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की मांग की. संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ठाकरे ने यह भी मांग की कि महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हाल में हुए चुनावों को रद्द किया जाए और इन राज्यों में मतपत्रों का उपयोग करके दोबारा मतदान कराया जाए. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "ज्ञानेश कुमार को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए और जेल में डाला जाना चाहिए." ठाकरे ने कहा, "मैं ज्ञानेश कुमार की पोल खोलने के लिए निर्वाचन आयुक्तों (ईसी) सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी को धन्यवाद देता हूं." उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को इस पूरे मामले का संज्ञान लेना चाहिए. उद्धव ने कहा कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों को आयोग द्वारा लिए गए सभी "गलत फैसलों" को रद्द कर देना चाहिए. उन्होंने कहा, "देश में लोकतंत्र को बचाने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए."
चुनाव आयोग ने दी सफाई
इलेक्शन कमीशन ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद प्रेस नोट जारी किया, जिसमें दो चुनाव आयुक्त ने SIR प्रॉसेस में गड़बड़ियों पर एतराज जताया था. इस पर आयोग ने बयान जारी किया है. चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग राय और ऑब्जर्वेशन बातचीत का एक नॉर्मल हिस्सा हैं. आखिरी फैसला लेने से पहले वे फैसला लेने के प्रॉसेस का हिस्सा होते हैं. सिर्फ तीन कमिश्नर ही नहीं, बल्कि कमीशन का हर ऑफिसर इलेक्टोरल सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कमीशन को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से उत्तरदायी है. 10 महीने के समय में फैले कुछ खास इंटरनल नोट्स/ऑब्जर्वेशन को हाईलाइट करना और अप्रूवल, फ़ैसलों, इंस्ट्रक्शन और इनिशिएटिव के बहुत बड़े ग्रुप को नज़रअंदाज करना, तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा दिखाता है. हाल के महीनों में, कमीशन ने कई फैसले लिए हैं, निर्देश जारी किए हैं, लगभग 40 नई इनिशिएटिव शुरू की हैं और देश भर में इलेक्टोरल रोल रिविजन (SIR सहित) करने सहित कई इलेक्टोरल रिफॉर्म किए हैं. ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे कमीशन के एकमत से लिए गए फैसलों का नतीजा हैं.
आम लोगों का वोट काट रहे हैं सीईसी- केसी वेणुगोपाल