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देखिए JOURNALIST VISHNU AGARWAL के साथ Dr. NIKHIL BANSAL का खास इंटरव्यू

EXCLUSIVE INTERVIEW WITH DR. NIKHIL BANSAL/ENDOVASCULAR EXPERT/VISHNU AGARWAL/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM

नमस्कार, मैं डॉक्टर निखिल बंसल। मैं एक एंडोवस्कुलर एक्सपर्ट एंड इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट हूं। मैं एसोसिएट प्रोफेसर हूं और मेरे पास में अभी इंटरवेंशन रेडियोलॉजी की डीएम सीट्स भी हैं। अगर हम इंटरवेंशन रेडियोलॉजी की बात करें तो एक बहुत मिनिवेसिव सर्जिकल टेक्निक है कि अगर हम पहले बात करें तो पहले ओपन सर्जरी होती थी। समय के साथ में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी आई। उसके बाद में और थोड़ी मिनिमल इन्वेसिव सर्जरी आई। मगर आज का जो जमाने का समय है वो पिनह होल सर्जरी के लिए और भी मिनिमल इनविज़िबिव सर्जरी का समय आ चुका है। तो इन सब सर्जरीज में कहीं पे भी कोई चीरफाड़ नहीं होती है। कोई लंबी दवाइयां नहीं चलती हैं। क्योंकि चीरफाड़ नहीं होती है तो वापस आपको आके टांके कटवाने की आवश्यकता नहीं होती है। आपको उसके लिए इंफेक्शन रोकने के लिए कोई भारी भरकम एंटीबायोटिक नहीं खानी पड़ती है। उसके कोई जो धुलप जो बाकी साइड इफेक्ट्स होते हैं उससे भी हम दूर रह पाते हैं। हमें कोई मेन पेन किलर्स नहीं खाना पड़ता है। तो हम लोग एक बहुत मिनिमल इनविज़िव तरीके से हम लोग इस किसी भी प्रकार की जो सर से ले पैर तक की जो मेजर सर्जरीज हैं उनको हम किया जा सकता है। जो हमारे पास मैक्सिमम जो पेशेंट्स आते हैं उनमें वकोस वेन है। पैरों के अंदर नसों का उभार होना। लो में भ्रांतियां रहती हैं कि अगर हम इलाज भी कराएंगे तो बीमारी वापस हो जाएगी। बट मैं आपको निश्चितता से बता सकता हूं कि एक इमेज गाइडेड थेरेपी एक इंटरवेंशन रेडियोलॉजी से कीवी वकोस सर्जरी चांसेस ऑफ रिकरेंस बहुत कम होते हैं या ना के बराबर रहते हैं। उसके अंदर कोई कॉम्प्लिकेशंस के चांसेस नहीं रहते हैं। अगर शरीर में सर से ले पैर तक कहीं पे भी किसी भी नस में अगर खून का रुकाव रुक जाए तो उसको भी पतली ट्यूब के द्वारा जाके खींच के निकाला जा सकता है। अगर किसी एक्सीडेंट में या फिर अल्सर के कारण पेट में शरीर की कहीं और जगह पे अगर नस फट जाती है तो आप कॉइल द्वारा या मेडिकेटेड ग्लू द्वारा उस नस को रोका जा सकता है। वो खून का बहना रुकाया जा सकता है। उसी समय में महिलाओं की बात करें तो काफी सारे जगह हैं जहां पे बच्चेदानी कोई भी एक छोटी बीमारी होगी कि सफेद पानी की शिकायत है कि बच्चेदानी में रसोली है। फाइब्रॉइड है तो सबसे पहले यूट्रस निकाल लें। बट आज इंटरवेंशन रेडियोलॉजिस्ट के द्वारा आप सुई के द्वारा आप उस गठान को जाके पूरी तरह से बिना चीरफाड़ के उसको बंद किया जा सकता है। कई बार पोस्ट डीएनसी ब्लीडिंग होती है या फिर प्लेसेंटा को लेके और बाकी चीजों को लेके दिक्कतें होती है तो उन सब में इंटरवेंशन रेडियोलॉजी द्वारा किया हुआ जो प्रोसीजर है वह बहुत कारगर है। दिमाग में थक्का जम जाना या खून का बह जाना जो हम जानते हैं स्ट्रोक कि लकवा हो जाना। लकवा सिर्फ आप पेशेंट के लिए दिक्कत नहीं है। उनके साथ वालों के लिए भी एक बड़ा समस्या है। तो अगर सही टाइम पे अगर पेशेंट आता है और उस थक्के को निकलवा लेता है या फिर कोई नस फट गई है उसे मेडिकेटेड ग्लू द्वारा बंद करवा लेता है तो यह जो परमानेंट डिसेबिलिटी है उससे बचा जा सकता है। अगर कोई लीवर सिरोसिस का पेशेंट है, पेट में बार-बार पानी भर जाना, पोर्टल हाइपरटेंशन, खून निकलना, मुंह के रास्ते से, लैट्रिन के रास्ते से लीवर खराब है तो उसमें हमेशा हमें एक जटिल सर्जरी की जरूरत नहीं है। हम लोग सुई के द्वारा एक नया बाईपास सर्जरी करके एक अंदर के अंदर एक छल्ला डाल के उस प्रेशर को कम किया जा सकता है। टारगेटेड कीमोथेरेपी, टारगेटेड रेडियोथरेपी कुछ एक प्रकार के लीवर के कैंसर्स हैं। जहां पे हम लोग गठान को सीधे अंदर जाके कीमोथेरेपी दे सकते हैं। हमें आईवी लाइन की जरूरत नहीं है कि हमें कीमोथेरेपी या रेडियोथरेपी की जरूरत पड़े। हम सीधे अंदर जाके जहां पे गठान को जो जरूरत है वहां पे सीधे जाके उन सेल्स को मारा जा सकता है। अगर कोई छोटी गठान है 5 सें.मी. से कम है तो बिल्कुल सुई के द्वारा जाके वह 5 सें.मी. की गठान को बंद किया जा सकता

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