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भरतपुर में डीग जिले के मेवात क्षेत्र में साइबर ठगों ने ठगी का नया रास्ता खोजा है। दरअसल सोशल मीडिया पर दूध देने वाले पशुओं को सस्ते दामों में बेचने का विज्ञापन सामने आया। जानते हैं क्या ये नए ठग नकली सोने की ईंट बेचने वाले पुराने गिरोह के वंशज हैं?

BHARATPUR NEWS/DAILY INDIATIMES

भरतपुर: डीग जिले के मेवात में रहने वाले साइबर ठग अब दूध देने वाले गाय भैंस को सस्ते दामों में बेचने का झांसा देकर लोगों के साथ ठगी कर रहे हैं। साइबर ठगों ने अब लोगों के साथ ठगी करने का एक नया रास्ता अख्तियार किया है। इसके लिए साइबर ठग ऑनलाइन सोशल मीडिया साइट के जरिये दूध देने वाले पशुओं को सस्ते दामों में बेचने का विज्ञापन देते है। बुकिंग के नाम पर रुपये ठगते और उसके बाद डिलीवरी कराने के नाम पर ठगी करते है।

पुलिस ने ऐसे ठगों के खिलाफ की कार्यवाही

डीग जिले की जुरहरा थाना पुलिस ने साइबर ठगी करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी खेत में बैठकर ठगी कर रहे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह गाय भैंस को सस्ते दामों में बेचने के नाम पर ठगी करते थे।

10 साइबर ठग कर रहे थे ठगी

जुरहरा थाना अधिकारी अमित कुमार चौधरी 19 नवंबर को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि कामां जुरहरा रोड़ पर पाई गांव के पास स्थित पेट्रोल पंप के पीछे खेत में कुछ साइबर ठग ठगी कर रहे हैं। इस सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। वहां कुछ युवक मोबाइल चलाते हुए नजर आये।

जानवर बेचने के नाम पर कर रहे थे साइबर ठगी

सभी लोगों को घेराबंदी कर पकड़ा। सभी की तलाशी ली तो, उनके पास 12 मोबाइल, 12 फर्जी सिम मिली। मोबाइलों को चेक करने पर ठगी के सबूत मिले। आरोपी गाय भैंस को सस्ते दामों में बेचने के विज्ञापन सोशल मीडिया पर डालते थे। जो लोग उनसे संपर्क करते उन्हें वह झांसे में लेकर ठगी करते थे।

साइबर ठगी का नया रास्ता करते है अख्तियार

दरअसल मेवात के ठग सबसे पहले यानी कई वर्ष पूर्व जब सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था तब वह लोगों को नकली सोने की ईंट सस्ते दामों में बेचने का झांसा देकर ठगी करते थे । लोगों को झांसे में लेते थे कि हम जेसीबी मशीन चलाते है और खुदाई के दौरान एक सोने की ईंट मिली है। हम इसको बाजार कीमत से आधे दामों में बेचना चाहते है। ठग इतने होशियार होते थे की जब ग्राहक ईंट को खरीदने आता तो उसको असली सोने का सैंपल देते और जब ग्राहक उसकी जांच करता तो सही पाते। लेकिन जब ईंट को खरीदकर ले जाते और उसकी जांच करवाते तो वह नकली निकलती थी।

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