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राजेश शर्मा/भरतपुर/डेली इंडिया टाइम्स/16 जून 2025

भरतपुर से हृदयस्पर्शी खबर: जिस पिता ने बच्चों के लिए हलवाई से लेकर मिस्त्री तक का काम, अब छोड़ गया साथ, मां पहले ही हो चुकी अलग, रूला देगी कहानी

राजस्थान के भरतपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां एक पिता, जो अपने तीन छोटे बच्चों के लिए हलवाई और मिस्त्री का काम करता था, का निधन हो गया। ढाई साल पहले माँ के चले जाने के बाद, घनश्याम नामक यह व्यक्ति अकेले ही बच्चों का पालन-पोषण कर रहा था।

भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर से एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसे पढ़कर और सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाएंगी। एक पिता जो अपनी तीन नन्ही जानों के लिए हलवाई से लेकर मिस्त्री तक का काम करता था, अब इस दुनिया में नहीं रहा। एक हलवाई पिता, जिसने अपने तीन बच्चों के लिए दिन-रात मेहनत की, अब इस दुनिया में नहीं रहा। ढाई साल पहले मां भी छोड़ गई थी साथ… अब अस्पताल की बेंच पर बैठकर रोते मासूम बच्चों की आंखें बस एक सवाल पूछती रहीं—अब हमें कौन अपनाएगा?”

अचानक उठा सीने में दर्द, और खत्म हो गई जिंदगीघटना भरतपुर के अटलबंद थाना इलाके की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,तिलक नगर लोकमन क्षेत्र में रहने वाले घनश्याम (42) को शनिवार रात अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। पड़ोसी फौरन उसे सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन किस्मत ने उसका साथ छोड़ दिया था। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घनश्याम के साथ उसके तीन मासूम बच्चे—पवन (7), पायल (6) और विष्णु (5) रहते थे। इन बच्चों की मां उन्हें ढाई साल पहले छोड़कर जा चुकी थी, और अब पिता की भी मौत हो जाने से तीनों बच्चे पूरी तरह अनाथ हो गए हैं।

अस्पताल में फूट-फूट कर रोते रहे मासूमपिता की मौत के बाद जब तीनों मासूम बच्चों को अस्पताल में रखा गया, तो वहां का हर मंजर किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था। मासूमों को समझ ही नहीं आ रहा था कि उनके पापा अब कभी वापस नहीं आएंगे। जो भी उन्हें चुप कराने की कोशिश करता, वो उसके गले लगकर बिलखने लगते। घनश्याम के भाई राम प्रसाद को सूचना दी गई, जो कुम्हेर से भरतपुर पहुंच गए। फिलहाल तीनों बच्चों को राम प्रसाद के सुपुर्द कर दिया गया है। वहीं, पिता का पोस्टमार्टम कर शव सौंपा गया है।इस पूरे हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जिंदगी कभी भी किसी की परीक्षा ले सकती है।

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