विष्णु अग्रवाल आप सभी का स्वागत करता हूं। आप देख रहे हैं डेली इंडिया। बड़ी दर्दनाक खबर है
। राजधानी दिल्ली भी सुरक्षित नहीं रही। अब हम बात कर रहे हैं कल राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास स्थित मेट्रो स्टेशन पर। ठीक शाम को 6:52 पर वहां एक संदिग्ध कार खड़ी थी और संदिग्ध कार में अचानक से एक ब्लास्ट होता है और करीब 10 से ज्यादा लोगों की दर्दनाक मौत हो जाती है और करीब 30 से 40 लोग घायल हो जाते हैं जो अभी भी हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। एक बड़ा सवाल इस घटना ने भारत की सुरक्षा तंत्र से जुड़ा हुआ एक बड़ा सवाल है जो खड़ा कर दिया है। मेट्रो स्टेशन के एक राजधानी दिल्ली के अंदर अगर इस तरह की घटना को नहीं रोका जा सकता इसको पूरी तरह से आतंकवादी घटना माना जा रहा है और हालांकि संदिग्ध की पहचान हो चुकी है। उसके चेहरे को सामने लाया जा चुका है। मीडिया में सुर्खियों में एक संदिग्ध आतंकवादी का चेहरा जो है वो वायरल हो रहा है। लेकिन सवाल वो संदिग्ध आतंकवादी नहीं है। सवाल है कि इतनी बड़ी सुरक्षा में चूक देश की सुरक्षा में चूक, राजधानी दिल्ली की सुरक्षा में चूक वो भी लाल किले के पास कैसे हो गई? लाल किले के पास जो मेट्रो स्टेशन है वहां ये ब्लास्ट हुआ। शाम को 7:00 बजे के आसपास जब वहां काफी भीड़ होती है, काफी रश होता है, काफी गहमा गहमी होती है। वहां ये ब्लास्ट हुआ। जो मौके पर लोग थे उन्होंने बताया कि अचानक से एक कोई मांस का टुकड़ा उनके चेहरे पर आकर लगा। अचानक से कोई हाथ हवा में उछल गया। अचानक से कोई सिर हवा में उछल गया और अचानक से कोई किसी का फेफड़ा हवा में उछल गया। करीब 700 से 800 मीटर तक के इलाके को इस बड़े हादसे ने एक बम ब्लास्ट ने पूरे दिल्ली को दहला दिया। पूरे दिल्ली ही नहीं हम कहें कि पूरे देश को हिला दिया। क्योंकि देश के दिल पर अटैक हुआ, लाल किले पर हमला हुआ। एक बड़ा सवाल जो सुरक्षा तंत्र के सामने खड़ा हो गया है और क्यों ना खड़ा हो आज भारत के जो प्रधानमंत्री हैं पिछले एक से दो महीने का समय हो गया। बिहार विधानसभा चुनाव में भारत के प्रधानमंत्री ने अपना पूरा 100% योगदान दे


