
VISHNU MITTAL/BHARATPUR NEWS/DAILY INDIATIMES DIGITAL JOURNALISM PLATFORM/11 09 2025
उच्चैन ब्लॉक में सरकारी स्कूलों का हो रहा जीर्णोद्वार• रिटायर्ड व्याखाता रिखबचन्द कमलेश मित्तल ने शुरु की अनूठी पहल- 24 स्कूलों को 120 हजार की राशि दान

हलैना (विष्णु मित्तल) जब ईश्वर ने दिया है और कुछ करने लायक बनाया, तो फिर क्यों न देश व समाज के लिए कुछ कर जाए ऐसी सोच व विचार रखने वाला ही व्यक्ति ही महान और समाजसेवी कहलाता है,जिसे व्यक्तियो को सभी लोग याद करते है और अन्य लोग भी जागरुक होते है,जिससे देश एव समाज का उत्थान एव विकास होने लगता है। ऐसी सोच तथा विचार वाले व्यक्ति का जन्म हुआ भरतपुर जिले के कस्वा उच्चैन निवासी रिटायर्ड प्रधानाध्यापक स्व. प्रभूदयाल मित्तल के परिवार में,जो हे रिटायर्ड व्याखाता रिखब चन्द कमलेश मित्तल है। ये दोनों ने सरकारी सेवा करते हुए देश, समाज व जरूरतमन्द परिवारों की सेवा की और रिटायर्ड होने के बाद भी निस्वार्थ भाव से सेवा कर रहे। अब इन्होने राजस्थान राज्य के झालावाड जिले के एक सरकारी स्कूल में हुई दुखांतिका से आहत हो कर अनूठी पहल शुरू की है, जो उच्चैन ब्लॉक के सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्वार कराने में आर्थिक सहयोग करने की घोषणा की। जिसमें 50 प्रतिशत की भागदारी स्कूल के स्टाफ की निधारित की। भामाशाह रिखबचन्द कमलेश मित्तल ने उच्चैन ब्लॉक के 24 सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्वार को 5-5 हजार की राशि प्रदान की, जिसके साथ 5-5 हजार की राशि स्कूल के स्टाफ ने भी स्कूल के ज्ञान संपर्क पोर्टल जमा कराई है। सीबीईओ अलका तिवारी ने बताया कि कस्वा उच्चैन निवासी रिखबचन्द मित्तल पुत्र प्रभूदयाल मित्तल एवं रिटायर्ड शिक्षिका कमलेश मित्तल पत्नी रिखबचन्द मित्तल ने उच्चैन ब्लॉक के सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्वार कराने के उद्देश्य से अनूठी पहल प्रारम्भ की है,जिन्होने स्कूल के स्टाफ की ज्ञान सम्पर्क पोर्टल पर 5 हजार रूपए की भागदारी अदा करने पर रिखब चन्द कमलेश मित्तल फाउण्डेशन ने 5 हजार रूपए की मदद करने की घोषणा की। पहले चरण में ब्लॉक के 24 सरकारी स्कूलों के स्टाफ द्वारा 5-5 हजार रूपए पोर्टल पर जमा कराने के बाद रिखबचन्द कमलेश मित्तल ने एक लाख 20 हजार रूपए जमा करा दिए, जिस राशि से कमरा की छत्त, शौचालय, कमरा के बरामदा आदि की मरम्मत कराई जा रही है, कई सरकारी स्कूल के भवनों की दशा में सुधार हो गया। उन्होने बताया कि उच्चैन ब्लॉक के गांव बहरारेखपुरा, अजीतपुर, कैमासी, चक रामनगर, चोखा, बसेरी, मई गुर्जर, मदरियापुरा, तेहरालोधा, बहरावली, सहना, खरैरा, नगला तोता, तुहिया पट्टी, भोंट, उच्चैन, बंजी, चक सहना नगला बीजा, विरावई, चक नगला बीजा, नगला तेरद्दियां सहित 24 गांवों के राजकीय उच्च माध्यमिक, माध्यमिक, उच्च प्राथमिक, प्राथमिक एवं महात्मा गांधी अंग्रेजी मध्याम स्कूल लाभाविन्त हुए है, जहां जीर्णोद्वार कार्य जारी है। इधर शिक्षा विभाग के रिटायर्ड संयुक्त निदेशक वासुदेव गुप्ता ने बताया कि रिखब चन्द कमलेश मित्तल ने भरतपुर जिले के 50 सरकारी विद्यालयों में करीब 3 लाख 24 हजार 180 की राशि देकर शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग किया, जो इस क्षेत्र में सराहनीय कार्य है।- कौन है रिखबचन्द कमलेश मित्तलकस्वा उच्चैन निवासी छैलबिहारी पाराशर एवं देवदास गोयल ने बताया कि उच्चैन की धरा में स्व. प्रभूदयाल मित्तल के परिवार में जन्मे रिखबचन्द मित्तल और उनकी पुत्रवधू कमेलश मित्तल पत्नी रिखबचन्द मित्तल बचपन से ही देशभक्त व समाज सेवी है, साथ ही जरूरतमन्द परिवारों की मददगार ये दम्पति शिक्षा विभाग में सर्विस करते और सर्विस के दौरान स्कूल के बच्चों को पाठ्यसामग्री,यूनिफार्म,गर्म कपडे, स्कूल बैग सहित गरीब, किसान परिवारों के बच्चों की स्कूल फीस आदि की मदद करते और स्कूल व सार्वजिक स्थल के निर्माण कार्यों में आर्थिक मदद। साथ ही कस्वा की अग्रवाल धर्मषाला मोक्षधाम, धार्मिक स्थल, स्कूल के निर्माण में आर्थिक सहयोग प्रदान करने में अग्रणी रहे । रिखबचन्द मित्तल व्याखाता पद व कमलेश मित्तल वरिष्ठ अध्यापक पद से रिटायर्ड होने के बाद भी देश, समाज व जरूरमन्द परिवारों की मदद कर रहे। इन्होने उच्चैन ब्लॉक के सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्वार के लिए अनूठी पहल प्रारम्भ की, जिससे स्कूल के स्टाफ और अन्य लोगों में जागरूकता आई । उन्होने बताया कि इन्होंने कस्वा के भामाशाह है,जिन्होने शिक्षा, कृषि, उच्च शिक्षा, पेयजल, गौवंश पालन, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भता, प्राकृतिक आपदा, गरीब परिवारों की विवाह योग्य कन्याओं की शादी व पढाई में सहयोग, धर्मशाला, स्कूल, मोक्षधाम आदि के निर्माण में आर्थिक योगदान अदा किया।


राजेश अग्रवाल jaipur/DAILY INDIATIMES/08092025
फेसबुक से लाखों कमाने का राज! 1,000 व्यूज की कीमत जानकर दंग रह जाएंगे

फेसबुक से लाखों कमाने का राज! 1,000 व्यूज की कीमत जानकर दंग रह जाएंगेफेसबुक से पैसे कमाने के लिए क्रिएटर्स को सबसे पहले इसके मॉनेटाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा बनना पड़ता है। लेकिन कमाई सिर्फ व्यूज पर ही निर्भर नहीं होती। इसमें कई चीजें मायने रखती हैं, जैसे कि लाइक, शेयर, कमेंट्स यानी एंगेजमेंट मेट्रिक्स, आपके दर्शकों का देश (ऑडियंस डेमोग्राफिक्स), और वीडियो पर चलने वाले विज्ञापनों का परफॉर्मेंस। यानी जितना बेहतर आपका कंटेंट और उसका रिस्पॉन्स, उतनी ज्यादा कमाई!
डिजिटल युग में सोशल मीडिया अब सिर्फ टाइमपास का जरिया नहीं रहा, बल्कि ये कमाई का एक शानदार मंच भी बन गया है। फेसबुक उन प्लेटफॉर्म्स में से एक है, जो यूट्यूब की तरह ही कंटेंट क्रिएटर्स को अच्छा-खासा पैसा कमाने का मौका देता है। जिनके वीडियोज पर लाखों-करोड़ों व्यूज आते हैं, उनकी कमाई हर महीने लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि आजकल लोग नौकरी छोड़कर फुल-टाइम कंटेंट क्रिएटर बनने का रास्ता चुन रहे हैं।
फेसबुक पर कमाई का तरीका क्या है?
रिपोर्ट्स की मानें तो फेसबुक पर औसतन 1,000 व्यूज के लिए क्रिएटर्स को 1 से 3 डॉलर (लगभग 88 से 264 रुपये) मिल सकते हैं। लेकिन ये रकम हर किसी के लिए एक जैसी नहीं होती। आपका कंटेंट कैसा है, दर्शक किस देश से हैं, और एंगेजमेंट कितना है, ये सब कमाई को प्रभावित करता है।खास बात ये है कि 2025 में फेसबुक ने Reels पर क्रिएटर्स की कमाई को और बढ़ा दिया है। अगर आपका कंटेंट जबरदस्त परफॉर्म करता है, तो प्रति व्यू 15 से 50 रुपये तक की कमाई भी हो सकती है। यानी अगर आपके वीडियो वायरल हो गए, तो कमाई की कोई सीमा नहीं!
1,000 व्यूज पर कितना मिलता है?
आपके वीडियोज पर दिखने वाले विज्ञापनों का परफॉर्मेंस आपकी कमाई का सबसे बड़ा फैक्टर है। अगर दर्शक उन विज्ञापनों पर ज्यादा क्लिक करते हैं, तो आपकी जेब में ज्यादा पैसे आएंगे। इसके अलावा आपके दर्शकों की लोकेशन भी बहुत मायने रखती है। अगर आपके वीडियोज अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप जैसे देशों में ज्यादा देखे जाते हैं, तो भारतीय दर्शकों की तुलना में कमाई कहीं ज्यादा होगी।
कमाई को क्या प्रभावित करता है?
अगर आप चाहते हैं कि फेसबुक पर आपकी कमाई लगातार बढ़े, तो हाई-क्वालिटी कंटेंट बनाना जरूरी है। साथ ही, अपने दर्शकों के साथ लाइव चैट, कमेंट्स या इंटरैक्शन के जरिए जुड़े रहें। जितना ज्यादा एंगेजमेंट, उतनी ज्यादा कमाई! क्रिएटर्स को चाहिए कि वे लगातार बेहतर वीडियोज बनाएं और अपने फॉलोअर्स के साथ मजबूत रिश्ता बनाए रखें।


